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बरगद के पेड़ो पे शाखें पुरानी,
पत्ते नए थे, हाँ,
वोह दिन तो चलते हुए थे मगर,
फिर थम से गए थे, हाँ.

लाओ वोह बचपन दुबारा,
नदिया का बहता किनारा,
मक्के दी रोटी, गुड की सैवाय्याँ,
अम्मा का चूल्हा, पीपल की छया,
दे दो कसम से पूरी जवानी,
पूरी जवानी, हाँ.

पियूष मिश्रा.